06 दिसंबर, 2009

खल्लास - कहानी भाग 2 (दिव्या माथुर)

नीरा के प्रस्ताव को सुन कर मार्टिन स्तब्ध रह गया। कॉकनी (चालू अंग्रेज़ी) में वह हकलाते हुए बोला-- किंतु क्या रोज़ी आपकी माँ को कोई आपत्ति नहीं, क्या वह जानतीं है कि आप यहाँ आईं हैं।

-- वह मेरा विवाह पीटर से रचाना चाहती हैं और जानी का प्रस्ताव ठुकरा कर पीटर से विवाह का नतीज़ा तो आप जानते ही हैं।

-- आप यदि पीटर से शादी करना चाहें तो आपकी सुरक्षा का जि़म्मा मैं ले सकता हूँ। -आंखे झुकाए मार्टिन बोला।

-- मैं जानती हूँ किंतु मैं पीटर से विवाह नहीं करना चाहती। उसे मैंने सदा छोटे भाई-सा माना है। स्कूल में जब उसे 'बुली' किया जाता था तो मैं ही उसे बचाती थी।

मार्टिन को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे।

-- मैं जानती हूँ कि एक जवान लड़की को गिरोह में शामिल करना एक बड़ी जि़म्मेदारी है और शायद आपको मेरी ज़रूरत भी न हो किंतु मैं पढ़ी-लिखी हूँ, आपके दफ्तर का सारा काम संभाल सकती हूँ। वैसे पापा की तरह, मेरा निशाना भी बहुत अच्छा है।

-- नहीं वो बात नहीं है...।

-- आप अपने साथियों से पूछ कर देख लीजिए। यदि उन्हें आपत्ति न हो तो...

जैसे ही मार्टिन बाहर गया, नीरा की नज़र उसके दफ्तर की साफ सुथरी और सादी सजावट पर गई। मेज़ पर एक अच्छे किस्म का पेन और डायरी थी, उसका मन हुआ कि देखे कि मार्टिन ने उसमें क्या लिखा है। नीरा को ध्यान आया कि मार्टिन की वेशभूषा भी उसके कमरे की-सी ही थी, सीधी सादी। स्पष्टत वह मार्टिन से बहुत प्रभावित हुई थी। आई तो थी वह अपने जीवन का सौदा करने किंतु अपना दिल दे बैठी थी। अपने को कुछ संयत करके मार्टिन बाहर निकला तो देखा कि उसके साथी दरवाज़े पर कान लगाए बैठे थे।

नीरा जानती थी कि मार्टिन उसे 'न' कह ही नहीं सकता था। हालांकि मार्टिन को देख कर नीरा स्वयं भी विचलित-सी थी। शिकार करने को आए, शिकार होके चले वाली कहावत चरितार्थ हो गई थी। साथियों से पूछने वाली बात उसने सिर्फ़ इसलिये कही थी कि उसके साथी कहीं ये न सोंचे कि मार्टिन ने उन्हें घास तक नहीं डाली। उसे काम तो इन सबके साथ ही करना होगा, ये वही लोग हैं, जिन्होंने मार्टिन को पाल पोसकर बड़ा किया है। चाहे मार्टिन को उनसे पूछने की आवश्यकता न हो, इन लोगों की इज़ाज़त लिये बिना यदि उसने नीरा से 'हाँ' कह भी दी तो वह इनका स्नेह और सम्मान खो बैठेगा, जो नीरा कभी नहीं चाहेगी।

नीरा का प्रस्ताव सुनकर वे सभी आश्चर्यचकित थे। स्पष्टत:, गिरोह के पुरुषों को कोई आपत्ति नहीं थी किंतु शैरी को एक नवयुवति की घुस पैठ गले नहीं उतर रही थी। सिवा मार्टिन के शैरी ही उस गिरोह की सबसे कम उम्र की सदस्य थी। एक नवयुवती का गिरोह में शामिल होना कहीं उसके महत्व को नगण्य न कर दे। अधेड़ उम्र की शैरी को दो एक सालों से ये चिंता सताने लगी थी कि वह बूढ़ी होने को आई और अब तक अकेली है। हालाँकि वह आज भी बड़ी सुंदर दिखती थी पर उसकी आँखो के नीचे झाँइंयाँ उभर आई थीं, जिन्हें वह सुबह-सुबह फाऊंडेशन के नीचे छिपा कर ही बाहर निकलती थी। अब उसे पब से कोई लगाव नहीं था। जब तक हेनरी जिंदा था, शैरी उसे रिझाने का प्रयत्न करती रही, ये जानते हुए भी कि वह शादीशुदा था और एंजला का दीवाना भी किंतु कोई था जिसे वह मन ही मन चाहती थी। सिड बहुत बूढ़ा हो गया था और वैसे भी उसे अब मार्टिन के अलावा कुछ नहीं सूझता था।

-- अगर तुम नीरा पर भरोसा कर सकते हो तो ठीक है। -शैरी और क्या कहती। एंजला को कोई एतराज़ नहीं था। वह मन ही मन वह प्रसन्न थी कि उसकी पुरानी सखी रोज़ी पहाड़ तले आई तो, फिर चाहे बेटी के ज़रिये ही सही और नीरा को वह मन ही मन पसंद करती थी, नीरा एक अच्छी लड़की थी और सबसे बड़ी बात कि वह उसके आशिक की बेटी जो ठहरी।

हेनरी मरते दम तक एंजला का दीवाना रहा। शायद उस अशुभ शाम को उसने अपनी जान भी एंजला के लिये ही गंवाई थी। एक पियक्कड़ ने शराब का गिलास लेते समय एंजला का हाथ पकड़ लिया था। यूँ तो पबो में किसी का हाथ थाम लेना या किसी को चूम लेना आम बात है, किंतु एंजला की तरफ किसी का आँख उठाना भी हेनरी को पसंद नहीं था जबकि ग्राहकों की ऐसी हरकतों पर एंजला को स्वयं कोई एतराज़ नहीं था। हेनरी ने आव देखा न ताव, अँगूठे को हथेली में दबा अपनी दो उंगलियों को पिस्तौल के रूप में उसकी कनपटी पर सीधे तानकर बोला-- खल्लास।

दोस्तों के उकसाने पर उस पियक्कड़ ने एक झटके से हेनरी की पिस्तौलनुमाँ उंगलियाँ मरोड़ दीं। हेनरी ने उसके गाल पर उल्टे हाथ की एक धौल जमाई ही थी कि मार्टिन ने बीच बचाव करवा के हेनरी को घर भेज दिया किंतु होनी को कुछ और ही मंज़ूर था। उस रात हेनरी कुछ अधिक ही पिये हुए था। रास्ते में उसने गुंडो को फिर ललकारा तो बात हाथापाई पर उतर आई। जब तक मार्टिन के गिरोह के सदस्य घटना-स्थल पर पहुंचते, हेनरी को चाकू घोंपा जा चुका था। सिड और एंजला के समझाने के बावजूद कि हेनरी मर चुका था, मार्टिन उसे कार में लाद कर अस्पताल ले गया था। कहीं किसी स्तर पर उसे सदा लगता रहा कि उसकी वजह से ही एक निर्दोष बच्ची का पिता छिन गया, एक स्त्री विधवा हो गई। तिस पर नीरा की घृणा उसे अलग कुतरे जा रही थी। उसके मन में छिपी पीड़ा एक रूपक कविता के रूप में बह निकली जो उसने हेनरी की मय्यत पर सबको पढ़ कर सुनाई। उस दोपहर को चर्च में नीरा के अलावा, कई दुश्मनों के भी दिल जीत लिये थे मार्टिन ने।

रोज़ी बहुत दिन तक बड़बड़ाती रही कि न वह मनहूस एंजला उनकी जिंन्दगी में आती और न ही माँ-बेटी को ये दिन देखना पड़ता। यूँ देखा जाए तो एंजला ने हेनरी की विनय पत्रिका कभी स्वीकार नहीं की किंतु एक अड़ियल टट्टु की तरह हेनरी अड़ा ही रहता यदि मार्टिन ने उसके आगे गोआ से आई रोज़ी से विवाह करने का प्रस्ताव न रखा होता। एक तरह से ये सुझाव एंजला का ही था ताकि हेनरी उसकी जान छोड़ दे। एक ओर जहाँ हेनरी मार्टिन को मना नहीं कर सका, दूसरी ओर वह रोज़ी को भी कभी स्वीकार नहीं कर पाया। रोज़ी को कुछ ही दिनों में ये राज़ मालूम हो गया था किंतु वह क्या कर सकती थी। एक अच्छे क्रिस्चियन की भाँति वह जिये गई कि प्रभु यीशु एक दिन हेनरी को सही रास्ते पर अवश्य ले आएंगे। विवाहित होते हुए भी वह विधवाओं जैसे कपड़े पहनती रही कि हेनरी कभी तो उसे एक अच्छी रंगीन ड्रेस उपहार में देगा, जिसे पहनकर वह सधवा हो जाएगी।

मार्टिन को पढ़ाई से अधिक निशानेबाज़ी और मारने पीटने आदि की ही ट्रेनिंग कहीं ज्यादा मिली किंतु सही मायने में मार्टिन विनम्र और दयालु किस्म का नवयुवक था जिसे लड़ने-भिड़ने का कोई शौक न था। माँ और पिता के अनुग्रह पर उसने पिस्तौल चलाना और सेल्फ डिफैंस जैसी कलाएं सीख लीं थीं किंतु जिनकी ज़रूरत उसे कभी महसूस नहीं हुई क्योंकि उसके गिरोह के सदस्य सदा ढाल बनकर उसके आगे खड़े हो जाते थे। पब में किस्म-किस्म के लोग उठते-बैठते थे, इसीलिए गिरोह को लेकर बैठना और लोगों पर अपना रौब जमाना आवश्यक था। समय-समय पर एक-आध शराबी को धमकी देना और पब से बाहर फेंक देना आदि धंधे के लिये आवश्यक था।

पति को दुश्मन की गोली से बचाती, मार्टिन की माँ स्वयं मारी गई थी। मरते समय उसने बेन से वादा लिया था कि मार्टिन की खातिर, उसे एक जगह टिक कर रहना होगा। बेन के पास केवल इतना ही धन था कि वह हार्ल्सडन जैसी सस्ती जगह में एक बड़ी इमारत सस्ते में खरीदकर उसमें एक पब खोल ले और इस तरह शुरु हुआ बेन्ज़ डेन, जहाँ वह अपने वफादार साथियों के साथ रहने लगा। मुहल्ले वालों के कुनमुने एतराज़ को बेन ने मुफ्त में शराब पिलाकर दबा दिया। बेन की आकस्मिक मौत के बाद, आस पास के कुछ गुंडो ने सिर उठाया था किंतु बेन के वफादार साथियों ने उनकी एक न चलने दी। मार्टिन को सिड और एंजला ही ने पाला था किंतु माँ-बाप की तरह नहीं, एक नाबालिग बच्चे की तरह जिसके माँ-बाप असमय स्वर्ग सिधार गए थे। उनकी नज़र कभी मार्टिन की संपत्ति पर नहीं गई। सब के सब मार्टिन के प्रति पूरी तरह समर्पित थे। पब से अच्छी खासी कमाई हो रही थी और सब ठीक चल रहा था। शैरी पब का सारा काम संभालती और एंजला घर की देखभाल करती। इन दोनों के बीच की खटपट ही रोज़मर्रा की उस रट को तोड़ती जो धीरे-धीरे चढ़ती उम्र की तरह बढ़ रही थी।

नीरा के पब में बैठने के साथ ही पब के ग्राहक बढ़ गए थे। अपनी ओर ग़लत नज़र उठाने का भी मौका नीरा कभी किसी को नहीं देती थी। जहाँ किसी ने छेड़खानी की नहीं कि वह इधर-उधर खिसक लेती। ऐसा तो नहीं कि पब में गाली-गलौज की कमी हुई हो, किंतु अधिकतर ग्राहक अब बड़े अदब से पेश आने लगे थे। नीरा के रूप और 'लेडी लाइक' व्यवहार से सभी प्रभावित थे। शैरी जब अपने बंधे बंधाए ग्राहको को भी नीरा को निहारते पाती तो रूठकर चुपचाप एक कोने में बैठ जाती किंतु नीरा की भोली मुस्कुराहट उसे जल्दी ही अपनी ओर खींच लाती। नीरा का प्रयत्न रहता कि हर वार्तालाप में शैरी को सम्मलित किया जाए।

दो महीनों में ही मार्टिन उसका पूरी तरह से दीवाना हो चुका था। एंजला ने नीरा के मन की टोह ली और मार्टिन ने नीरा को झट हीरे की अंगूठी पहना दी।

जानी तना-तना घूम रहा था। उसकी बीमारी का इलाज थी नीरा, जो मार्टिन से विवाह रचाने जा रही थी। वह जानता था कि मार्टिन की वजह से ही पीटर का विवाह होते-होते रुक गया था। जानी ने समझा कि पीटर उसके दिल की लगी को समझ सकता है। उधर रोज़ी के विश्वास दिलाने पर कि वह नीरा को मना लेगी, पीटर सपने सजा के बैठा था। उसके दोस्तों ने, जो नीरा से उसके विवाह की बात मानने को वैसे भी तैयार नहीं थे, उसका उठना बैठना दूभर कर दिया था। गहरी चोट खाई थी पीटर ने और वह सचमुच जानी का हमदर्द बन बैठा था।

चट मंगनी और पट ब्याह भी हो गया किंतु रोज़ी पूरी तरह से अब भी आश्वस्त नहीं थी और मन ही मन जानती थी कि जब तक वे हार्ल्सडन में हैं, उनकी जान को खतरा बना ही रहेगा। एक तरफ जहाँ जानी का गिरोह अपने पाँव जमा रहा था, मार्टिन और नीरा प्रेम क्रीड़ा में मग्न थे। माँ की चेतावनियों को सनक समझकर वे उन पर कोई कान ही नहीं दे रहे थे। पीटर के मुताबिक जानी भूखे शेर की तरह घूम रहा था और नीरा को पाने के लिए वह कुछ भी करने को तैयार था। पीटर, जो रोज़ी के बहुत करीब था, जानी से हुई अपनी बातचीत उसे बता देता था। चाहे जानी के फंदे में फंस चुका था, वह नीरा को दुख पहुंचते नहीं देख सकता था।

लाचार रोज़ी अपने भाई-भाभी से मिलने पुर्तगाल पहुंच गई कि देखे कि वे लोग नीरा को स्पौंसर कर सकते हैं कि नहीं। वे खुशी-खुशी राज़ी हो गये थे, नीरा को ही नहीं मार्टिन को भी वहाँ बुलाने के लिये। उनके अपने तो कोई औलाद थी नहीं, अकेलेपन को भरने के लिये इससे अच्छा और क्या उपाय हो सकता था। बेटी के साथ-साथ दामाद और फिर उनके होने वाले बच्चे भी तो उनके आंगन में ही खेलेंगे।

रोज़ी खुशी-खुशी लंदन लौटी थी और जब एंजला ने उसे खुशखबरी दी कि वह नानी बनने जा रही है, उसे लगा कि जैसे उसकी सारी चिंताएं छूमंतर हो गईं हों। बच्चे की खातिर ही सही किंतु जब नीरा पुर्तगाल में बसने के लिये मान गई तो मार्टिन के पास क्या चारा था। एंजला और सिड के लिये भी मार्टिन और नीरा की सुरक्षा सर्वोपरि थी। टैक्सियाँ द्वार पर खड़ी थीं। सामान रखा जा चुका था। काफिला चलने को तैयार खड़ा था। शैरी रुकने को झट मान गई तो एंजला को बड़ी हैरानी हुई कि शैरी और बाहर जाने का कोई मौका छोड़ दे। सिड को विदाई की रस्म से सख्त परहेज़ था। शैरी के कहने के बावजूद कि कुछ ही घंटो की ही तो बात है, वह पब को संभाल लेगी, वह एअरपोर्ट जाने को तैयार नहीं हुआ।

सिवा मार्टिन के, सब लोग टैक्सियों में बैठ चुके थे कि फोन की घंटी सुनाई दी। शैरी, जो दरवाज़े पर ही खड़ी थी, भाग कर अंदर गई और फिर अंदर से ही चिल्लाई, "नीरा, तुम्हारा फोन है।"

"पूछो तो सही किसका फोन है।" एंजला ने झुंझलाते हुए कहा।

"मैं एक मिनट में आई।" नीरा एंजला की बात को अनसुना करती हुई भाग कर अंदर गई। वह हैरान थी कि इस समय किसका फोन हो सकता था किंतु ये सोचकर कि पुर्तगाल से उसके मामा-मामी का फोन होगा ये पूछने को कि वे घर से रवाना हुए कि नहीं या फिर पीटर का, जिसने नीरा के विवाह के बाद से उससे बात करना ही छोड़ दिया था। वह उल्लसित थी कि शायद उसने अब 'बाय' कहने को फोन किया था। उससे बिना मिले या बिना बात किये जाना उसे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था।

-- नीरा, बी क्विक, वी विल मिस दि प्लेन।

रोज़ी ने हांक लगाई। मार्टिन ने सोचा कि इतनी लंबी बात वह किससे कर रही है कि उसे प्लेन के समय का भी ध्यान न रहे। वह पब की ओर चला ही था कि दरवाज़े पर नीरा दिखाई दी। जानी उसके पीछे था। नीरा की गर्दन को अपने हाथ की लपेट में लिये, उसने पिस्तौल नीरा की कनपटी पर रखी हुई थी। अपनी जेब में पिस्तौल थामें मार्टिन आगे बढ़ा। उसका खून खौल रहा था।

-- लीव नीरा टु मी। आई एम रैडी टु स्पेयर यू, मार्टिन। -जानी सीधे-सीधे अपनी बात पर आ गया।

-- वाटएवर यू से जानी, बट डोंट हर्ट हर। -मार्टिन गिड़गड़ाया।

-- डोंट ट्राइ एनिथिंग फन्नी विद मी, आई एम वार्निंग यू। -नीरा के गले में अपनी बांह का फंदा कसते हुए जानी ने अपनी पिस्तौल की नली उसकी कनपटी पर कुछ और गड़ा दी।

तभी जानी के दो और गुंडों के साथ पीटर दिखाई दिया। जानी ने उन्हें अपनी ओर आने का संकेत दिया। -- फॉर गॉड्स सेक पीटर, शी इज़ प्रैगनैंट। -रोज़ी ने नज़दीक से गुज़रते हुए पीटर से कहा तो वह नीरा की ओर देखने लगा। उसका मन भीग-भीग उठा।

-- डोंट लिसन टू दैट बिच, पीटर। -जानी पीटर को अपनी ओर खींचता हुआ बोला। -- यू रास्कल। -मार्टिन को मौका देती हुई रोज़ी नीरा की ओर भागी।

जानी ने बौखला कर गोली चला दी, रोज़ी वहीं ढेर हो गई। बौखलाई हुई नीरा अपनी माँ की लाश पर बिछ गई और ज़ोर-ज़ोर से विलाप करने लगी।

इसी बीच साँसों को संभालता बूढ़ा सिड दरवाज़े के बीचों बीच आ खड़ा हुआ।

-- मार्टिन, माई चाइल्ड, वी आर आल डूम्ड, शैरी हैज़ सोल्ड अस टू द डैविल।

इससे पहले कि सिड कुछ और कहता, शैरी ने उस पर गोली चला दी। एंजला दौड़ कर दम तोड़ते हुए सिड के पास आ बैठी। अपने कान को सिड के मुंह पर लगाए वह केवल यह भर सुन सकी कि शैरी ने ही जानी को नीरा और मार्टिन के लंदन छोड़ने की खबर दी थी। फोन के बहाने नीरा को अंदर भी उसने ही बुलाया था, जहाँ जानी उसके इंतज़ार में छिपा खड़ा था।

-- यू स्नेक, यू बिच, यू होर।

एंजला को दगाबाज़ शैरी के लिये उपयुक्त शब्द नहीं मिले तो वह उसका गला घोंटने पर उतारू हो आई।

-- लीव शैरी एलोन, अदरवाइज़ आई विल किल दैट सन आफ ए होर।

जानी का निशाना अब मार्टिन पर था।

-- जानी डार्लिंग, डोंट हर्ट मार्टिन। यू हैव प्रोमिस्ड पीटर, लेट हिम टेक नीरा एंड गो।

एंजला की ओर गर्व से देखते हुए शैरी ने कहा मानो स्थिति उसके वश में हो।

-- डोंट टेल मी वाट टू डू, बिच।

जानी ने उसे पूरी तरह से नज़रंदाज़ कर दिया था। वह इतनी हैरान और परेशान थी कि उसे समझ ही नहीं आया कि ये कहर उस पर कहाँ से टूटा।

-- यू बास्टर्ड, यू सन आफ ए बिच --कहती हुई बेहाल शैरी जानी की ओर लपकी।

जानी नियंत्रण खो चुका था। शैरी को अपने रास्ते से हटाने के लिए उसने गोली चला दी। इससे पहले कि मार्टिन गोली चलाता, क्रोधित पीटर ने जानी को अपना निशाना बना कर गोली चला दी किंतु बिजली की-सी फुर्ती से जानी ने नीरा को अपने आगे कर लिया।

नीरा के सिर से उफनता खून ज़मीन पर सुनामी-सा फैलने लगा। नीरा का खून देख कर पीटर मानो पागल हो गया। उसने एक के बाद एक गोलियाँ दागनी शुरु कर दीं। जानी उसके सीधे निशाने पर था। दूसरा साथी भौंचक्का-सा खड़ा था। अपनी पिस्तौल वह पीटर पर साध ही रहा था कि मार्टिन ने गोली चला दी किंतु इससे पहले की मार्टिन की गोली उसे लगती, जानी का दूसरा गुंडा पीटर पर गोली चला चुका था। मृत्यु के वक्त पीटर की व्यथित आँखे नीरा पर ही टिकी थीं।

लाशों से घिरा मार्टिन नीरा के पास जा बैठा। -- खल्लास। --रोज़ी के होंठो पर एक शब्द कुछ देर के लिए ठहरा और फिर फिसल गया।

-- नहीं नीरा, अभी नहीं। --एक आखिरी गोली की आवाज़ हवा में देर तक गूंजती रही।

दूर से आते पुलिस की गाडि़यों के साइरन सुनाई दे रहे थे जो इस शहर के लिये रोज़मर्रा की बात थी। अपने-अपने घरों में लोग नाश्ता करते रहे, सांस रोके, टी वी के सामने बैठे, समाचार सुनने को बेताब कि पड़ौस में आज सुबह क्या घटा था।

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