लंबे समय तक दोस्त और उसके बाद प्रेमी-प्रेमिका रहे संता और बंतानी ने निर्णय लिया कि अब उन्हें विवाह कर ही लेना चाहिए। एक दिन बंतानी ने बातों ही बातों में संता से कहा: हमें एक-दूसरे से मिते-जुलते लंबा अरसा हो गया है। हम एक-दूसरे को अच्छी तरह जान-समझ चुके हैं। अब मुझै लगता है कि हम दोनों को शादी कर लेनी चाहिए। संता बोला: बात तो तुम्हारी एकदम सही है, मगर अब जबकि पूरा शहर हमारे प्रेम-प्रसंग से परिचित हो गया है, तो फिर आख़िर हम दोनों से शादी कौन करेगा?
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बंतानी पार्क में बेंच पर बैठी थी।
भिखारी बंता: हाय डार्लिग!
बंतानी (नाराजगी से): मुझे डार्लिग कहने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?
भिखारी संता: तो फिर तुम मेरे इस ‘बिस्तर’ पर क्या कर रही हो?
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प्रतिभाशाली वैज्ञानिक संता ने न्यूटन के गति के तीन नियमों में एक और नियम जोड़ा है: ‘लूज मोशन कभी भी स्लो मोशन में नहीं हो सकता।’
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वेटर बंता ने संता को खाने का बिल दिया।
संता: ये लो, मेरे कार्ड में से ले लो।
बंता: पर सर, यह तो राशन कार्ड है।
संता: अबे स्साले, तो फिर बाहर क्यों लिख रखा है कि ‘सभी तरह के कार्ड स्वीकार किए जाते हैं।’
20 मार्च, 2010
चिट्ठी
मिसेज संता वागले जली-भुनी बैठी थी। मिस्टर संता आफिस से आए तो उन्होंने नाराज़गी का कारण पूछा।
मिसेज संता- तुम्हारी मां ने मेरी इंसल्ट की है।
मिस्टर संता- कैसे! वह बेचारी तो 500 किमी दूर मेरे छोटे भाई के साथ रह रही हैं।
मिसेज संता- उन्होंने आपके नाम एक चिट्ठी भेजी थी, जिसे मैंने दोपहर में खोलकर पढ़ लिया।
मिस्टर संता- तो?
मिसेज संता- तुम्हारी मां ने चिट्ठी के आखिर में लिखा था- तुमने तो चिट्ठी पढ़ ली, अब इसे मेरे बेटे को दिखाना मत भूलना!
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संता ने बंता को बताया- मैं तो उसी से शादी करूंगा, जो मेहनती हो, सादगी से रहे, घर को संवारकर रखे और जो मेरे इशारों पर चले।
बंता ने कहा- यार, घर आकर मेरी नौकरानी से मिल लेना। उसमें ये सभी गुण हैं।
मिसेज संता- तुम्हारी मां ने मेरी इंसल्ट की है।
मिस्टर संता- कैसे! वह बेचारी तो 500 किमी दूर मेरे छोटे भाई के साथ रह रही हैं।
मिसेज संता- उन्होंने आपके नाम एक चिट्ठी भेजी थी, जिसे मैंने दोपहर में खोलकर पढ़ लिया।
मिस्टर संता- तो?
मिसेज संता- तुम्हारी मां ने चिट्ठी के आखिर में लिखा था- तुमने तो चिट्ठी पढ़ ली, अब इसे मेरे बेटे को दिखाना मत भूलना!
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संता ने बंता को बताया- मैं तो उसी से शादी करूंगा, जो मेहनती हो, सादगी से रहे, घर को संवारकर रखे और जो मेरे इशारों पर चले।
बंता ने कहा- यार, घर आकर मेरी नौकरानी से मिल लेना। उसमें ये सभी गुण हैं।
दौड़
एक दिन संता बुझक्कड़ शहर घूमने गया। उसने देखा, एक बड़े से मैदान में बहुत भीड़ जुटी है। और एक लाइन में दस युवा अधझुके खड़े हैं।
संता बुझक्कड़ ने पास खड़े युवक बंता बोस पूछा- भैया यहां क्या हो रहा है?
बंता बोस ने कहा- बाबा, यहां दौड़ हो रही है।
संता बुझक्कड़- ये क्यों दौड़ रहे हैं?
बंता बोस- बाबा, ये कप पाने के लिए दौड़ रहे हैं।
संता बुझक्कड़- कप किसको मिलेगा?
बंता बोस- जो जीतेगा, उस व्यक्ति को मिलेगा।
संता बुझक्कड़- फिर ये बाकी क्यों दौड़ रहे हैं?
संता बुझक्कड़ ने पास खड़े युवक बंता बोस पूछा- भैया यहां क्या हो रहा है?
बंता बोस ने कहा- बाबा, यहां दौड़ हो रही है।
संता बुझक्कड़- ये क्यों दौड़ रहे हैं?
बंता बोस- बाबा, ये कप पाने के लिए दौड़ रहे हैं।
संता बुझक्कड़- कप किसको मिलेगा?
बंता बोस- जो जीतेगा, उस व्यक्ति को मिलेगा।
संता बुझक्कड़- फिर ये बाकी क्यों दौड़ रहे हैं?
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